हो सबकी पूरी आशा, नव वर्ष कि ये है अभिलाषा
हर पेट में हो रोटी,
हर तन पर हो धोती,
चिंता-तृष्णा हो छोटी,
हो जाये शांत पिपासा, नव वर्ष कि ये है अभिलाषा
कुछ आम का पेड़ लगायें
कुछ दीन-बाल को पढ़ायें
हम अपना कर्त्तव्य करें,
हक बने न मात्र दिलासा, नव वर्ष कि ये है अभिलाषा
खादी भी उजली हो जाये,
संसद का रुके तमाशा
निर्धन को संपन्न करें,
न कि बदले परिभाषा, नव वर्ष कि ये है अभिलाषा
बाँट सके न भारत को -
फिर जाति धर्म या भाषा,
मनुज मनुज की तरह मिले
छटे दिलों से कुहासा, नव वर्ष कि ये है अभिलाषा
हो सबकी पूरी आशा, नव वर्ष कि ये है अभिलाषा.
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